पेट का दर्द

अमाश्य मे अधिक अम्ल बनने, आंतों मे कीडे होने या यकृत (जिगर) के बढ जाने के कारण जब पेट मे दर्द होने लगता है तो उसे उदर शूल कहते है। नाभी का दर्द आंतों के कीडो के कारण होता है। नाभि के उपर का दर्द पेट मे गैस बनने से होता है। पेट के उपरी दाई भाग मे दर्द यकृत के दर्द के कारण होता है। नाभि के दाई ओर का दर्द किडनी के दर्द के कारण होता है। यह विभिन्न कारणो से होता है जैसे गैस के कारण होने वाला दर्द वातोदर, पित्त के कारण होने वाला दर्द पित्तोदर, कफ़ के कारण होने वाला दर्द कफ़ोदर, प्लीहा के कारण होने वाला दर्द प्लीहोदर, पेट मे पानी भरने से होने वाला दर्द जलोदर कहलाता है, इसके अतिरिक्त कब्ज के कारण और पेट मे घाव होने से भी दर्द होता है।

लक्षण
पेट दर्द से पीडित रोगी मे विभिन्न लक्षण दिखाई देते है जैसे पेट का फ़ूलना, भूख न लगना, चक्कर आना, खट्टी डकारें आना, गैस का रिसाव बार-बार होना, रुक-रुक कर दर्द होना, बेचैनी होना, भोजन का न पचना, पेट की सूजन, शरीर मे सुस्ती आदि।

परहेज
साग-सब्जी, फ़ल, रेशेदार खाना, मूंग की दाल की खिचडी, दलिया, जौं, गर्म पानी, कुल्थी की दाल, अजवायन, मूली का रस, हींग रस, कच्चा लहसन, काला नमक, नीबूं, काली तोरी, लोकी, मेथी, प्याज, चोकर मिला आटा की रोटी, अनार आदि का सेवन लाभदायक है।

तला व भारी भोजन, कच्चे पदार्थ, मैदा व महीन आटे के पदार्थ, मटर, चना, चावल, राजमा, उडद, कच्चा आयोडीन नमक, उडद, मिर्च आदि नुकसानदायक है।

1. हरड या त्रिफ़ला हल्के गर्म पानी के साथ लेने पर लाभ मिलता है।
2. अजवायन व काला नमक मिलाकर लेने से लाभ होता है।
3. अविपत्तिकर चूर्ण लेने से गैस निकल जाती है।
4. खाने के बाद लवणभास्कर चूर्ण लेने से भोजन आसानी से पच जाता है।
5. खाना खाने के उपरांत द्राक्षासव चिकित्सक की सलाह से लेने से आराम आता है।

उपर्लिखित उपयोग के साथ QRS Treatment लेने से बिमारी पूर्णतया नष्ट हो जाती है।

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