अमाश्य का घाव

काफ़ी लम्बे समय तक पेट मे दर्द, पाचन तंत्र से संबंधी बीमारी या गैस आदि कारणों से अमाश्य मे जख्म हो जाता है। यह दो प्रकार का होता है द्रव शूल एवं परिणाम शूल।

गलत खानपान से अमाश्य मे जमा द्रव धीरे-धीरे जख्म बना देता है जिससे पेट मे तेज दर्द पैदा होता है। इस रोग मे रोगी को भोजन के तुरंत बाद दर्द होने लगता है। इस तरह भोजन के बाद दर्द के साथ उल्टी आने की शिकायत या उल्टी आना भी हो सकता है। और उल्टी आने पर दर्द भी शांत हो जाता है।

इस बिमारी के रोगी को दूध से बनी वस्तुएं, पके केले और गेहूं निर्मित वस्तुओं का सेवन श्रेष्ठ होता है।
अम्ल, तेज मसाले, तले पदार्थ व वस्तुएं, तेज व आयोडीन युक्त नमक आदि घाव को हानि पहुंचाते है।

उपचार
1. समुद्री नमक के सेवन के साथ QRS Treatment लेने से शीघ्र लाभ पहुंचता है।
2. अजवायन मे काला नमक मिलाकर खाली पेट लेने व QRS Treatment दिन मे दो बार लेने से शीघ्र लाभ पहुंचता है।
3. मूली के रस मे नमक मिलाकर दिन मे कई बार पीने व QRS Treatment लेने से शीघ्र लाभ मिलता है।
4. छोटी पीपल का चूर्ण एक चौथाई से आधा ग्राम की मात्रा मे दही के साथ सुबह-शाम लेने व QRS Treatment लेने से लाभ मिलता है।
5. अंगूर, नारियल और आलू के रस मे शहद मिलाकर सुबह शाम पीने से एवं QRS Treatment से अत्यधिक लाभ मिलता है।

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