लिंगराज मन्दिर

यह मन्दिर उडीसा की मध्यकालीन शैली का विशालतम एवं सर्वप्रमुख मन्दिर है। इस मन्दिर की प्रशंसा करते हुये सुविख्यात विद्वान एवं कलाविद डा. कुमार स्वामी ने कहा है कि इसके वास्तविक निर्माता के विषय मे निश्चित जानकारी नही परन्तु कभी-कभी सोमवंशीय राजा महाभवगुप्त का नाम इससे जोडा जाता है।

लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर का सबसे बड़ा मंदिर है। कई कारणों से मंदिर का विशेष महत्व है। यह शहर का सबसे पुराने मंदिरों में से एक है और इसे 10वीं या 11वीं शताब्दी में बनवाया गया था। यह मंदिर भगवान शिव के एक रूप हरिहारा को समर्पित है और शहर का एक प्रमुख लैंडमार्क है।

इसकी वास्तुशिल्पीय बनावट भी बेहद उत्कृष्ट है और यह भारत के कुछ बेहतरीन गिने चुने हिंदू मंदिर में एक है। इस मंदिर की ऊंचाई 55 मीटर है और पूरे मंदिर में बेहद उत्कृष्ट नक्काशी की गई है। लिंगराज मंदिर कुछ कठोर परंपराओं का अनुसरण करता है और गैर-हिंदू को मंदिर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं है।

हालांकि मंदिर के ठीक बगल में एक ऊंचा चबूतरा बनवाया गया है, जिससे दूसरे धर्म के लोग मंदिर को देख सकें। यहां पूरे साल पर्यटक और श्रद्धालू आते हैं।

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