अजन्ता

अजन्ता की चित्रकला –

भारतीय चित्रकला मे अजन्ता का विशिष्ट स्थान है। यही कारण है कि प्राच्य एवं पाश्वात्य सभी कला मर्मग्यों ने अजन्ता की चित्रकला की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। अजन्ता की गुफ़ाएं महारास्ट्र प्रान्त के औरंगाबाद जिले मे स्थित है। इनकी सर्वप्रथम खोज जनरल सर जेम्स ने सन 1824 ई. मे की थी। यहां पर शैलकर्त्त गुफ़ायें हैं। इसके बाद एशियाटिक सोसाइटी आफ बंगाल के प्रयास से मेजर राबर्ट गिल को सन 1844 ई. मे तस्वीरों की नकल करने के लिये नियुक्त किया गया। उसके उपरांत लेडी हेरिघम ने अपनी अजन्ता फ्रेस्कोज नामक पुस्तक को 1915 मे लंदन की इण्डिया सोसाइटी से प्रकाशित कराकर चित्रकला के क्षेत्र मे महत्वपूर्ण योगदान दिया। उसके बाद पुरातत्व विभाग ने इन चित्रों को प्रकाशन, विश्लेषण एवं मूल्यांकन किया। 1879 तक विद्वानो का यह मत था कि अजन्ता मे कुल 16 गुफ़ाये है। लेकिन बाद मे कुल 29 पूर्ण निर्मित एवं एक अर्धनिर्मित गुफ़ाएं प्रकाश मे आई। ये सभी फरदापुर ग्राम के समीप क्षीणकाय बघोरा नदी के अर्द्ध-वृत्ताकार तट के किनारे-किनारे तक पहाडी के मध्य चट्टानो को काटकर निर्मित की गई।

अध्ययन की सुविधा के लिये इन गुफाओं को एक से 29 क्रम संख्या प्रदान की गई है। इन गुफाओं को दो स्पष्ट वर्गों मे भी विभक्त किया गया है:-

1. चैत्यगृह – ये पूजार्थक स्तूप युक्त गुफ़ायें है – इनमें पाँच गुफ़ायें शामिल है।

2. विहार (संघाराम) – ये भिक्षुओं के निवास हेतु निर्मित हैं। इसके अतिरिक्त ‘काल-क्रम’ की दृष्टि से इन गुफाओं का विभाजन किया गया है :-
अ – प्रारंभिक शैलकर्त्त गुफ़ायें
आ – परवर्ती शैलकर्त्त गुफ़ायें

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