खुजराहो मन्दिर

खुजराहो मन्दिर समूह के रूप मे उत्तर भारतीय नागर शैली अपने शीर्ष बिन्दु को प्राप्त हुई। खुजराहो के मन्दिर स्थापत्य सौन्दर्य की दृष्टि से अद्वितीय है। गुप्त काल मे तराशे हुये पाषाण खण्डो से चुनाई विधि द्वारा मन्दिर निर्माण की जिस परम्परा का श्री गणेश हुआ था, खुजराहो पहुँच कर वह अपने चरमोत्कर्ष बिन्दु को प्राप्त हुई।

उत्तरी मध्य प्रदेश के छतरपुर कस्बे से 43 किमी तथा पन्ना नगर से 40 किमी पश्चिम मे खुजराहो के विश्व विख्यात मन्दिरो का समुह अवस्थित है। चन्देल राजाओं ने यहां 84 मन्दिरो का निर्माण करवाया था, परन्तु वर्तमान मे केवल 30 मन्दिर ही शेष है। ये सभी मन्दिर पुरातत्व विभाग की देख-रेख मे हैं। इन्मे से अधिकांश मन्दिरो मे अब पूजा भी नही होती।

मन्दिरो के निर्माता चन्देल शासको की राजधानी संयोगवश मुस्लिम आक्रमंणकारियों से बची रही, इसीलिये यहां के अनेक मन्दिर भी बच गये। इन मन्दिरों का काल प्रायः दसवीं से तेरहवीं शताब्दी के मध्य माना जाता है।

ऊँची जगती चढकर, मन्दिर मे प्रवेश, पूर्व दिशा मे निर्मित अर्द्धमण्डप से होकर करना पडता है। इसके उपरान्त विशाल मण्डप या सभा कक्ष पडता है तथा पश्चिमी दिशा मे सबसे पीछे गर्भगृह बनाया हुआ है। ये सभी कक्ष पूर्व से पश्चिमी की और जाने वाली सीधी अक्ष पश्चिम रेखा पर निर्मित है। खजुराहो समूह के विकसित उदाहरणो मे गर्भगृह से पूर्व छोटा सा अन्तराल तथा गर्भगृह के चारों और प्रदक्षिणा पथ बनाये गये है। अनेको छोटे बडे शिखर मन्दिर की भव्यता मे चार चांद लगाते नजर आते हैं। छ्ते पिरामिडीय न होकर गुम्बजकार है। उडीसा की वास्तु शैली के अनुसार यहां मन्दिर पिरामिड की आकृति मे बनाते है। लेकिन इन मन्दिरो की वास्तु कला मे गुम्बद गोलाकार है।

कन्दरीय महादेव के अतिरिक्त खुजराहो मे 19-20 और मन्दिर है जो बेहतर हालत मे है, जिन्मे से कुछ मे आज भी पूजा प्राचीन पद्दतिनुसार ही होती है। ये मन्दिर दो समूहो मे विभक्त है, हिन्दू और जैन मन्दिर। यहां देवी जगदम्बी मन्दिर मे भगवान विष्णु ने शरण ली है। मतंगेश्वर मन्दिर के सामने वाराह मन्दिर है। चौसठ योगिनी मन्दिर, माता पार्वती की 64 सेविकाओं को समर्पित है। पश्चिम मे 6 जैन मन्दिर है। वैसे देखा जाये तो यह मन्दिर भी हिन्दु मन्दिरो के अनुसार ही बने है, लेकिन वातायन और गवाक्ष विहीन होने के कारण जैन मन्दिरो जैसे प्रतीत होते हैं। इनमे जिननाथ जी का मन्दिर और घंटाई मदिर मुख्य है।

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